आयुर्वेद और एलोपैथी स्वास्थ्य संरक्षण









सीख सको तो सीख लो मेरे मन के गीत। स्वर्ग दिखाऊंगा इस धरती पर, मैं हूं स्वर्ग रूपी संगीत‌‌।। जीतना चाहोगे मुझको भूल है तुम्हारी, क्योंकि मैं हूं एक अजीत। मंजीत मेरा शिष्य है और मैं हूं मन का मीत। अभी यश अपयश का भय है मुझको क्योंकि लक्ष्य है मेरा सुजीत।।

जूठन से घृणा करे, यह झूठी बुद्धिमानी समझ, माया-मानव-मन-मंदिर दिल या मंदबुद्धि संसार। 
सर्वत्र व्याप्त जीवन के भोजन-भजन, प्रकाश-पवन, जीव-जंतु सब हैं अनेकों के जूठन फिर भी मांझ-मांझ चमकाए, साबुन-सर्फ लगाए, जल-पवन से बार-बार धोए बन धोबन अपने साफ-सुथरे तन-वसन और बर्तन भंडार।।
निर्मल जल साबुन से धुल चुकी जो स्त्री, उसे अपवित्र कैसे और क्यों माने यह बुद्धिजीवी जन के विचार? गंदगी और जूठन से मैले हैं बुद्धिमानी समझ, माया-मानव-मन-मंदिर दिल या बुद्धिजीवी जन के द्वार।।।

💖🌎नींबू की तरह निचोड़ कर शरबत बना दूं तुझे या संतरा समझकर चूस-चूस मीठे जूस की तरह उपयोग में लाऊं तुझे।। दोनों में तेरा अपमान है किंतु दूसरे के जीवन में उपयोगिता ही तेरा काम है।💖🌎






😭 प्रत्येक महीने में एलोपैथी की दवाई, इंजेक्शन आदि लेने के बाद भी पूरी दुनिया भर में लगभग कई लाख लोगों के जान-माल की हानि हो जाती है, शरीर और स्वास्थ्य पर एलोपैथिक की दवाई, इंजेक्शन आदि और उपचार के साधनों से दुष्प्रभाव भी देखे जाते हैं तथा अनेकों बार अधिक मात्रा में मृत्यु भी हो जाती है।
   इसके लिए एलोपैथी को बढ़ावा देने वाले जिम्मेदार क्यों नहीं हैं? इसके लिए इसे मूर्ख विज्ञान कहना उचित है और इसीलिए मैं योग ऋषि स्वामी रामदेव जी और योग, आयुर्वेद, आयुष, होम्योपैथी आदि उपचार के तरीकों और साधनों का तन मन धन से समर्थन करता हूं।

 🌹🌺नीम-हकीम खतरा-ए-जान किंतु तुलसी-नीम दोनों भाई जान एवं आयुर्वेद का ‘एक महान वरदान’ जो रोग उपचारों में आते हैं काम।।।
 🎯अरे! ओ! ‘आदम’ जागरूकता रूपी अफवाहों पर मत कर ध्यान, तुरंत उपचार की नई तकनीक, चिकित्सक और विज्ञान का कर सादर सम्मान किंतु आयुर्वेदिक सदाबहार चिकित्सा सदैव आएंगे आपके काम।।।🎯
🌹😘 🌺अपनी जानकारी बढ़ा, आस पड़ोस में देख और आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी, पेड़-पादप की कर सही पहचान।।।🌹😘🌺
🎉🎊 प्रकृति में आयुर्वेदिक उपचार वाले पौधों की उपज बढ़ाओ, निरोग स्वस्थ काया बनाओ और साथ में बढ़ाओ अपना धन-धान, ऐसे आप बढ़ाओ अपना मान, “देश बनेगा और महान”।।।🎉🎊

हम भारतीय अपने जन्म दिन से ही और उससे भी पहले से ही किसी ना किसी तरह से आयुर्वेद, होम्योपैथी, योग और एलोपैथी के उपचारों का और दवाइयों का उपयोग करते आ रहे हैं। इसीलिए हमें इन सभी उपचारों के विकास, प्रयास और सफलता पर गर्व है। लेकिन आयुर्वेद, एलोपैथी के मुकाबले में सदियों से पूर्व प्रमाणित है जिसे और किसी प्रमाण की आवश्यकता नहीं है कि वे हमारे जीवन को बचाने में बहुत अधिक सक्षम है और इससे अभी तक अनगिनत लोगों के उपचार किये जा चुके हैं‌। इसके अलावा आयुर्वेद, योग, आयुष, होमियोपैथी आदि के उपचार से मानव शरीर या किसी भी जीव के उपचार करने पर उनके शरीर पर दुष्प्रभाव लगभग नहीं के बराबर होती है जबकि एलोपैथी में बहुत सी प्रकार की खांसी, बुखार, सर्दी, गर्मी, डायबिटीज, माइग्रेन आदि अनेक छोटी-मोटी और गंभीर बीमारी आदि को भी अभी तक पूर्ण रूप से स्थाई तौर पर उपचार करने और बीमारी को नष्ट करने में असफल है। हां मैं इस बात से बहुत अधिक सहमत हूं की आकस्मिक या तत्काल उपचार करने में एलोपैथी आधुनिक युग में बहुत आगे निकल चुकी है या विकास कर चुकी है क्योंकि दुनिया भर में विदेशी सरकारों ने यहां तक कि भारत के सरकारों ने भी एलोपैथी के विकास के लिए बहुत अधिक खर्च किये जा रहे हैं और मान्यता दी है लेकिन आयुर्वेद के लिए इसकी तुलना में बहुत कम मदद मिली है।

 इसीलिए हम आयुर्वेद, आयुष, योग और होम्योपैथी का अधिक आदर सम्मान करते हैं। 

सनातनी यज्ञ परंपरा को नियमित रूप से करते रहने से वायु में विद्यमान दुष्प्रभाव हानिकारक वाले विषाणु और कीटाणु नष्ट  हो जाते हैं। यह एक उपचार का प्राचीन और प्रभावशाली उदाहरण है जिससे अपने आसपास के वायु वातावरण को शुद्ध और सुगंधित करने तथा जीवन के अनुकूल बनाने हेतु उपयोग में लाई जाती है।

एलोपैथिक के मुकाबले इन सभी भारतीय उपचार अनुसंधान के लिए अभी तक बहुत कम सहायता सम्मान और विकास के लिए दूसरी मदद की गई है।

हम सभी मानव हितैषी लोग आयुर्वेद आयुष और इससे संबंधित सभी उपचार करता और दवाई आदि सहित योग ऋषि स्वामी रामदेव का तन-मन-धन से सहायता-सम्मान, आदर और समर्थन करते हैं।


We stand with yogrishi Swami Ramdev Ji.

मैंने जब से अपने शरीर का जागरूकता पूर्ण ध्यान रखना शुरू किया है मुझे कम से कम 20 वर्ष हो चुके हैं इतने वर्षों में मैंने अनेक बार झोलाछाप डॉक्टर या वैद्य या योग या घरेलू नुस्खा आदि या विज्ञापन से बीमारी के विशेषज्ञों से प्राप्त जानकारी  को अपने अनुभव के साथ मिलाकर उपयोग किया है और मैंने अनेकों बार छोटी-मोटी अनेक बीमारियों को बहुत ही कम लागत में और हॉस्पिटल या वैद्य के पास जाकर चक्कर लगाने के धन और समय को बचाकर अपने जीवन में रोग को हरा दिया है और स्वस्थ बनकर आज तक स्वस्थ जीवन बिता रहा हूं। लेकिन ये लोग क्या कह रहे हैं कि झोलाछाप डॉक्टरों और विज्ञापन तथा अपने खुद के अनुभव से किसी प्रकार का कोई भी इलाज संभव नहीं है और इसका दुष्प्रभाव बहुत अधिक है ऐसा डर फैलाकर बहुत अधिक धन और समय को डॉक्टर और वेद वैद्य के चक्कर में पड़कर बर्बाद कर दो, कर्जदार बन जाओ और फिर जीवन भर गधे की तरह मेहनत करके कर्ज चुकाते रहो जबकि वास्तविकता लगभग 70 से 90% इसके उलट है । हां कुछ प्रतिशत लोगों को दुष्प्रभाव का सामना करना होता है और उन्हें मृत्यु या गंभीर बीमार व्यवस्था तक पहुंच जाना पड़ता है।

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