भाई-बहन, बेटा-बेटी संबंधों की दशा और दिशा

 


धन-दौलत, गहने, कपड़े चाहे ले लो बहुमूल्य उपहार। मेरी रक्षा की प्रार्थना और कामना बाद में करो पहले अपनी रक्षा करो बारंबार।। अब से 'रक्षा-बंधन' "समर्थ रक्षक बांधेगा" शुभकामनाएं! सबको "रक्षाबंधन का त्यौहार"।।।


किसी दाढ़ी रखने वाले दीवाने ने कहा:-🥳समझदार लड़कियां गाड़ी पर नहीं मरती हैं, वह तो हल्की-हल्की दाढ़ी पर मरती हैं 🎊🎈 तो इसका जवाब है समझदार लड़कियां कभी गाड़ी पर मरती हैं, कभी दाढ़ी पर मरती हैं कभी-कभी सच्ची-झूठी तारीफ करने वाले की मायाजाल रूपी झाड़ी पर भी मरती हैं। इसलिए इसे ख़ुद समझो, ख़ुदा को मत समझाओ। “अमीर बनो और घर जाओ, अपना पवित्र-नवरात्रि का त्योहार मनाओ”।
Thank you for your great posts this week: Tulsi Yadav, One Level High Of I And My, Master Tulshi Yadav and Master Tulshi!

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💕पृथ्वी लोक पर जन्म तो अनेक जीवों का हुआ है लेकिन गाय चराना, बांसुरी बजाना, गोविंदा बन जाना और सुदर्शन धारी कृष्ण बनकर धर्म की रक्षा करना, अधर्मी का नाश करना ।
हे नाथ! नारायण वासुदेवा, धन्य है जीवन जो करे आपकी सेवा। श्री कृष्ण जन्माष्टमी के स्वागत का बांधों कलेवा।







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किसी दाढ़ी रखने वाले दीवाने ने कहा:-🥳समझदार लड़कियां गाड़ी पर नहीं मरती हैं, वह तो हल्की-हल्की दाढ़ी पर मरती हैं 🎊🎈 तो इसका जवाब है समझदार लड़कियां कभी गाड़ी पर मरती हैं, कभी दाढ़ी पर मरती हैं कभी-कभी सच्ची-झूठी तारीफ करने वाले की मायाजाल रूपी झाड़ी पर भी मरती हैं। इसलिए इसे ख़ुद समझो, ख़ुदा को मत समझाओ। “अमीर बनो और घर जाओ, अपना पवित्र-नवरात्रि का त्योहार मनाओ”।





19/01, 12:35] www mastertulshi38: Most precious phrase of the world which makes us very-very precious for that person or someone very-very special for us. Think and thought about it. How does it work?

[19/01, 18:54] www mastertulshi38: दुनिया का सबसे कीमती मुहावरा जो हमें उस व्यक्ति के लिए या किसी के लिए बहुत-बहुत कीमती बनाता है। इसके बारे में सोचो और सोचो। यह कैसे काम करता है?

तिरुवनंतपुरमः नाबालिग बेटी से बार-बार दुष्कर्म, पोक्सो कानून के तहत पिता को 106 साल कैद की सजा, पीड़िता 2017 में गर्भवती भी हो गई थी, जानें मामला


http://dhunt.in/vkIOC?s=a&uu=0x3b451eb22cadfb75&ss=pd

Source : "Lokmat News"  


इस मामले में पिता को यह सज़ा देना उचित नहीं है क्योंकि यदि यह उचित है तो गालियों को सज़ा के रूप में उपयोग नहीं की जाती। बाप-बेटी, मां-बेटा, भाई-बहन आदि के गैर कानूनी सामाजिक संबंध के लिए सजा़ के रूप में गालियां बनी हुई हैं। लेकिन गलत तरीके से गुस्से में लोग इन्हें उपयोग में लाते हैं, यह भी एक दंडनीय अपराध है ।


कौन सुनेगा?, किसको सुनाएं? इसलिए चुप रहते हैं:

     

    
https://www.facebook.com/100027927741458/posts/810003519940565/

18 साल से कम आयु की लड़कियों और 21 वर्ष से कम आयु के लड़कों की शादी के वर्जित होने का दुष्प्रभाव खुलेआम दिख रहे हैं। वर्ष 2021 में समलैंगिकों ने खुलकर करवा चौथ व्रत के त्यौहार को डाबर कंपनी के विज्ञापन के द्वारा प्रदर्शित किया है। कृपया अभी भी समय है प्राकृतिक नियम कानूनों को तोड़कर संवैधानिक नियम कानून बनाने वाले और नियम को कठोरता से पालन कराने वाले न्यायधीश और न्याय कर्मचारी भी सुधर जाएं।


😭 हम अपने बहन-बेटियों को पालते हैं, रक्षा करते हैं और सजाते हैं। किसके लिए ज़रा सोचो? ताकि दूसरे घर के और प्रदेश के लोग और लड़के इन्हें पसंद करें और इनसे शादी करने या करवाने के लिए तैयार हो जाए। शादी शब्द क्या है? शिक्षित लोगों द्वारा अश्लील शब्दों को शिष्टता से प्रयोग में लाई जाती है। शादी अर्थात यौन संबंध बनाने के लिए परिवार और समाज के सभी लोगों की सहमति मिल जाती है।

शादी से पहले भी घर के या परिवार के या सगे संबंधियों के लड़के-लड़कियां या भाई-बहनें दूसरे घर के या परिवार के या उनके सगे संबंधियों के लड़के-लड़कियों से या भाई-बहनों या बेटे-बेटियों से दोस्ताना संबंध रखते हैं या शारीरिक संबंध जैसे यौन संबंध आदि रखते हैं या उनके लिए अपना समय, धन, शरीर, मन आदि का नुकसान करते हैं या खपा देते हैं। उनमें से लगभग 98% लोगोंं की समाज में बहुत बदनामी होती है, उन्हें बहुत बुरा भला कहा जाता है, उनके परिवार बहुत दुुःखी होते हैं, सगे संबंधी बहुत विचलित हो जाते हैं और कई बार अधिक बदनामी के डर से लड़का-लड़की या भाई-बहन या बेटे-बेटियां या परिवार के अन्य लोग तथा सगे संबंधी आदि लोग अपना घर त्याग कर कहीं दूर चलेेे जातेें हैैैैं या आत्महत्या भी कर लेते हैं या दूसरों को मारने या मरवाने केेे लिए तथा बर्बाद करनेेे के लिए हर संभव प्रयत्न करते हैं।

ये सब क्यों हो रहे हैं ? हमारे घर की लड़कियां दूसरे घर के लड़कों के लिए अपने आप को बदनाम कर लेती हैं, बर्बाद कर लेती हैं या उनके द्वारा बदनाम और बर्बाद किए जाते हैं तथा दूसरे घर के लड़कियां हमारे घर के लड़कों के लिए अपने आप को बदनाम कर लेती है, बर्बाद कर लेती है या हमारे घर के लड़कों द्वारा या लोगों द्वारा उन्हें बदनाम किये जाते हैं या बर्बाद किये जाते हैैं। लड़कों के साथ भी यही सब खेल खेले जाते हैं। इन सभी के जिम्मेदार कौन हैं?

क्या हमने प्रकृति के नियम के साथ छेड़छाड़ कर के अपने नियम बनाए नहीं हैं? यह नियम हमने किस लिए बनाए हैं? क्या हमें इससे अधिक सुख की प्राप्ति होती है?


जानकारी प्राप्त कर आंकड़े एकत्रित करो आपको पता चलेगा इससे हमें और हमारे बहन, बेटी, परिवार सहित संबंधी परिवार और समाज को भी कम से कम 90 से 99% दु:ख की प्राप्ति इसी सामाजिक संबंध वाले नियम से होती है । अपने बहनों और बेटियों की शादी के लिए जीवन भर धन अर्जित करते रहते हैं और उनकी शादीशुदा जिंदगी के लिए इन धनों को उनकी और अपनी खुशी के लिए समर्पित कर देते हैं फिर भी हमें 😭 दु:खों की प्राप्ति होती है।


अब आपकी और हमारी सोच🙄 यह कहती है की यदि हमें इससे दुःख की प्राप्ति होती है तो हम क्या करें? समाज में ऐसा सदियों से होते आ रहे हैं । ये समाजिक नियम हैं और इसे हम तोड़ नहीं सकते क्योंकि समाज के लोग क्या कहेंगे? हम उन्हें क्या जवाब देंगे?

लेकिन इन संबंधों के कारण जब हम बहुत दुःखी हो जाते हैं तो हम लड़ते हैं, झगड़ते हैं, मुकदमा दर्ज कराते हैं, कई बार हत्या भी कर देते हैं या मरने-मारने के लिए तैयार हो जाते हैं‌। तब हमें समाज से डर नहीं लगता और हम समाज की परवाह नहीं करते हैं क्योंकि उस समय हमें  दुखों से बाहर निकलना होता है या अपने सगे संबंधियों को न्याय दिलवानी होती है या दुखों से बाहर निकालना होता है। जीवन भर और उसके बाद भी दूसरी पीढ़ी द्वारा ऐसी खेल होती रहती है।


हां यदि ऐसी घटना कुछ समय पूर्व में घटी हो तो हम बहुत अधिक सचेत होते हैं और जांच परख कर संबंधों को आगे बढ़ाते हैं और संबंधी चुनते हैं लेकिन उसके बाद भी फिर यही खेल अपने आप को दोहराती रहती है।


क्या हम सगे भाई-बहन को गर्लफ्रेंड और बॉयफ्रेंड अर्थात लड़का-लड़की दोस्त के रूप में स्वीकार नहीं कर सकते हैं? क्योंकि परिवार के सगे संबंधियों से अधिक अच्छी दोस्त, दोस्ती या मित्रता तो किसी से होनी असंभव तो नहीं लेकिन बहुत ही दुर्लभ और कठिन है।


क्या हम सामाजिक नियमों के कारण इतने कमज़ोर हो चुके हैं की हम अपने भाईयों-बहनों, बेटे-बेटियों को जवान होने के पश्चात हम उन्हें पति-पत्नी के रूप में नहीं देख सकते हैं? क्योंकि पिताजी और माताजी को बेटी से अच्छी बहू नहीं मिल सकती और बेटा से अच्छा दामाद नहीं मिल सकता। भाई को बहन से अच्छी जानने वाली दोस्त और जीवन में साथ निभाने वाली जीवन संगिनी अर्थात पत्नी नहीं मिल सकती साथ ही बहन को भाई से अच्छा जानने वाला दोस्त और जीवन में हर मुश्किल घड़ी में साथ निभाने वाला जीवनसाथी पति नहीं मिल सकता क्योंकि ये संबंध कई संबंधों से बंधी हुई है जिसमें एक संबंध का बंधन कमजोर पड़ने पर भी दूसरे संबंध का बंधन उसे जोड़ कर रखती और मजबूती प्रदान करती है।


🙏❤️ मेरी राय है यदि हम समस्या और दुखों के मूल को समझ चुके हैं तो हमें इस समस्या के मूल को ही नष्ट कर देनी चाहिए अर्थात अपने समाजिक नियमों में सुधार करने चाहिए और संबंधों को और अधिक सुखी बनाने का प्रयास करने चाहिए। सुधार के लिए हम सामाजिक लोगों में से ही किसी ना किसी को आगे आना चाहिए जिन्हें हम समाज सुधारक बना सकते हैं।

#StandUpForIndia

वीर दास ने विदेश में जाकर अपने स्वयं की मां, बहन, बेटी का कर दिया बलात्कार और विदेशों की गंदगी खाकर कर दिया अपने देश को शर्मसार।


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