महाभारत की सेना
महाभारत जो भारत का महान रूप-स्वरूप है जिसके अंदर रक्षा-सुरक्षा, शिक्षा, चिकित्सा के साथ साथ धैर्य और अदम्य साहस और शक्तिशाली क्षमता पूरी दुनिया की तुलना में अतुल्य है।
भारत के पास दुनिया को दिखाने के लिए अधिकतम केवल 50000000 रक्षा-सुरक्षा के अधिकारी सरकारी मान्यता प्राप्त कार्यरत रहते हैं। लेकिन वास्तविक महाभारत की सेना ऐसी सेना है जो दुनिया के हर कोने में रक्षा-सुरक्षा, शिक्षा, चिकित्सा और सेवा करने के क्षेत्र में कार्यरत रहती हैं, जो बहुत ही गंभीर समय में भारत की रक्षा सुरक्षा के लिए कार्यरत हो जाते हैं। इस महाभारत की सेना की संख्या कम से कम 15 करोड़ है और अधिकतम 25 करोड़ है इसे महाभारत की सेना कहते हैं।
इस महाभारत की सेना के अंदर पूरी दुनिया को जीतने और सुचारू रूप से संचालन करने की क्षमता है।
लेकिन ये सभी महाभारत की सेना तब तक भारत की सेवा के लिए उपस्थित नहीं होंगे जब तक की भारत देश का महान शासक, सेवक, सेवादार प्रधानमंत्री जी और प्रधानमंत्री जी के समर्थक सभी अधिकारी और लोग इस महाभारत की सेना का आह्वान भारत की रक्षा-सुरक्षा, शिक्षा, चिकित्सा के सुधार के लिए नहीं करती है।
भारत देश में या दुनिया के किसी भी देश में मुसलमान के रूप में देश के गद्दार, देशद्रोही, जेहादी और आतंकवादी तथा इन सभी के समर्थक लोग बहुत अधिक संख्या में पाए जाते हैं। इसके लिए इनकी संख्या घटाने की आवश्यकता नहीं है और जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने की आवश्यकता भी नहीं है क्योंकि किसी भी देश में शिक्षण-प्रशिक्षण, रक्षा-सुरक्षा के साथ-साथ वहां की नागरिकता के रूप में उस व्यक्ति को प्राप्त सभी अधिकार बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। बस इन सभी महत्वपूर्ण अधिकार को सरकार द्वारा सुचारू रूप से व्यवस्थित करके अपने नियंत्रण में लेकर ठीक की जा सकती है।
सुव्यवस्थित और विकसित राष्ट्र निर्माण के लिए केवल राष्ट्रवादी लोगों के बच्चों के लिए और लोगों के लिए शिक्षण-प्रशिक्षण, रक्षा-सुरक्षा की व्यवस्था और अधिकार होनी चाहिए। जनसंख्या नियंत्रण इस समस्या का समाधान नहीं है। समाधान करना है तो जो भी जिहादी, देश का गद्दार, आतंकवादी, देशद्रोही लोग नजर में आए उनकी पहचान करके उन्हें हमेशा के लिए देश में चुनाव में लड़ने या मतदान करने का अधिकार उनसे छीन लेना चाहिए। ऐसा करके केवल और केवल 20 वर्ष तक करके देखें उसके बाद भारत में चाहे हिंदू हो या मुसलमान सभी लोग राष्ट्रवादी बन जाएंगे और राष्ट्र हित में काम करते हुए नजर आएंगे।

Sam Khan आप मैं हम सब हिंदू हैं क्योंकि हिंदुस्तान में रहने वाला, हिंदुस्तान की जीवन शैली में जीने वाला हर व्यक्ति हिंदू कहलाता है। हम सनातनी हिंदुओं की मान्यता है कि देव हो या दानव, यक्ष हो या गंधर्व, पशु हो या जीव जंतु सभी परमात्मा के अंश हैं और सभी को अच्छे स्वरूप में, अपने मूल स्वरूप में वापस लौटना है। इसके लिए अपने कर्म के आधार पर आज या कल, कल या परसों या लगे वर्षों हमें अपने परमात्मा के मूल स्वरूप में वापस लौटना है। जो अपने अच्छे कर्मों को दूसरों के हित के लिए सेवा करते हुए अपना जीवन समर्पित करते हैं वे अपने मूल स्वरूप में शीघ्र लौट जाते हैं और जो नहीं कर पाते हैं, किसी कारण से माया जाल में फंस कर या दूसरे प्रकार के क्षणिक लालच और मज़े के कारण उन्हें अपने मूल स्वरूप में वापस लौटने में देर हो जाती है। अपने परमात्मा के मूल स्वरूप में वापस लौटना जिसे मोक्ष कहते हैं जिसके बाद फिर कोई और जन्म नहीं लेनी पड़ती है और जिसके बाद सुख-दुःख, कर्म-धर्म सभी खत्म हो जाते हैं।
अच्छे कर्म वैज्ञानिक रूप से जब ज्यादा से ज्यादा लोगों को लाभ पहुंचाते हैं, प्राणियों को लाभ पहुंचाते हैं, जीव जंतुओं को लाभ पहुंचाते हैं, पेड़-पौधों को लाभ पहुंचाते हैं तब वह धर्म कहलाती है और जो नुकसान पहुंचाते हैं, हानि पहुंचाते हैं तब वह अधर्म कहलाती है और धर्म की रक्षा के लिए समर्पित या बलिदानी या शिक्षा देने वाले व्यक्ति मोक्ष का पहला हकदार और अधिकारी होता है।
Ravi Mishra क्योंकि मुसलमान या इस्लाम को अनुसरण करने वाले लोग गुरु शुक्राचार्य के शिष्य हैं अर्थात दानव रूपी मानव हैं जिसे कुरान की शिक्षा और संदेश में यही बताई गई है कि जो तुम्हारे विचार या तौर तरीके से अलग हो, वो तुम्हारे लिए खतरा है और इस खतरे को जब तक तुम पूरी तरह से खत्म नहीं कर देते तब तक तुम्हें जन्नत नसीब नहीं होगी या तो इन्हें खत्म कर दो या खत्म करते-करते खत्म हो जाओ तब तो तुम जन्नत के हकदार हो नहीं तो जहन्नुम में तुम्हें बार-बार भेजा जाएगा और सताया जाएगा।
जय हिंद जय श्री राम, देश-दुनिया से मिटेगा जिहादियों देशद्रोहियों और आतंकवादियों का नामोनिशान,
इसलिए “देश के गद्दारों को, गोली मारो शालों को” कहते रहो सुबह शाम।
“अबकी बार, देशद्रोहियों, जिहादियों आतंकवादियों के समर्थन करने वाले गद्दारों का आर्थिक बहिष्कार ।”
“सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास में होना चाहिए सब का प्रयास ।”
जनता के पास सरकार है, सरकार के पास सेना है, सेना के पास क्षमता और शक्ति है, शक्ति के पास भक्ति है, भक्ति के पास शांति है। इस शांति को अधिक समय तक स्थापित करने के लिए देशद्रोहियों, जिहादियों और आतंकवादियों का नामोनिशान मिटाना ही होगा।




1)= (घ)
2)= (क)
3)= ( ख)
4)=(ग)
5)=(क)
6)=क्योंकि यहां जनसंख्या का एक विशाल भाग निरक्षर, भूखे और बिना घर के जीने को मजबूर हैं।
7) भारतीय अर्थव्यवस्था के कमजोर होने का मुख्य कारण निरक्षर, भूखे और बिना घर के जीने को मजबूर लोग हैं।
8) गरीबी एक स्थिति उत्पन्न करती है जिसमें लोग पर्याप्त आय प्राप्त करने में असफल हो जाते हैं इसीलिए वो जरूरी चीजों को नहीं खरीद पाते हैं।
9) एक निर्धन व्यक्ति अपने जीवन में मूल आवश्यकताओं के बिना जीता है जैसे भोजन, कपड़े, स्वच्छ जल, रहने के लिए घर, उचित शिक्षा आदि आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर पाते हैं। इसे मूल आवश्यकताओं के बिना जीना कहते हैं।
10) निर्धनता का मुख्य कारण उचित कला-कौशल, शिक्षण-प्रशिक्षण आदि का अभाव है।
11) = (क) निर्धनता का मुख्य कारण उचित कला-कौशल, रोजगार बढ़ाने के शिक्षण-प्रशिक्षण आदि की उचित व्यवस्था नहीं है।
(ख) निर्धनता को दूर करने के लिए उचित कला-कौशल, रोजगार बढ़ाने के तरीके आदि के शिक्षण प्रशिक्षण की उचित व्यवस्था करनी चाहिए और सभी को सीखने सिखाने के अवसर मिलने चाहिए।
(ग) मेरे पास गरीबी दूर करने के लिए बहुत अच्छी उपाय है, योजना है इस योजना के अनुसार हर व्यक्ति को कला और कौशल को सीखने-सिखाने का मुफ्त में आजीवन उचित अवसर मिलना चाहिए तथा उसे रोजगार उत्पन्न करने का प्रशिक्षण तथा धन संबंधी सरकारी सहयोग मिलनी चाहिए। और यदि व्यक्ति स्वयं अपनी इच्छा से बेरोजगारी उत्पन्न करता है तो उसकी सुख सुविधाओं को दंड के रूप में छीन लेनी चाहिए। जैसे उसके घर की बिजली की सप्लाई काट देनी चाहिए और उसके पास ऐश्वर्य के जो भी साधन है उसके उपयोग को वर्जित कर देने
चाहिए।
(घ) सभी नागरिक को उसकी मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति मुफ़्त में कराने की सरकार की जिम्मेदारी होनी चाहिए लेकिन ब्याज समेत उसकी वसूली भी सरकार की जिम्मेदारी होनी चाहिए।
(च) देश की सेवा करने वाले, रोजगार उत्पन्न करने वाले, देश की उन्नति में अपना योगदान देने वाले आदि लोगों का प्रोग्रेस कार्ड बनना चाहिए और उसके आधार पर उसकी सुख सुविधाओं को बढ़ा देनी चाहिए तथा उचित समय पर सेवानिवृत्त होने की उचित व्यवस्था करनी चाहिए।
(छ) मेरे द्वारा बहुत गहन अध्ययन और आंकलन करने के बाद मैं यह दावा कर सकता हूं कि उपर्युक्त जितने सुझाव, उपाय और योजना मैंने दर्शाई है अगर इसे अपनाया गया तो देश में गरीबी और बेरोजगारी से मुक्ति मिल जाएगी तथा बेरोजगारी कम से कम 95% खत्म हो जाएगी।
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