कोरोनावायरस के कहर से मुक़ाबला करते हिंदुस्तान के शहर

     🌎📌🎯100 साल के बाद भी छुआछूत को जिसने बढ़ावा दिया, डॉक्टर और दवाई के शोधकर्ता वैज्ञानिकों ने जिसको बहुत अधिक सम्मान दिया, न्याय देने वाले संविधान ने अन्याय का दामन थाम लिया, बीमारी के नामकरण कर्ताओं ने उसे कोविड-19 या कोरोना का नाम दिया।।

ऐसा भी समय आया जब जागरूकता के प्रचार प्रसार करने वाले न्यूज़ चैनलों ने अफवाहों का ब्रेकिंग न्यूज़ बनाकर खूब ज़ोर शोर से घर-बाहर, मनमंदिर हर जगह संचार किया।।।

किस पर भरोसा करें? जब गहरे से गहरे रिश्तों ने भी भेदभाव, छुआछूत, संदेह और डर आदि को अधिक महत्व दिया।।।🎯📌🌎



"कोरोनावायरस के कहर से

                       मुक़ाबला करते हिंदुस्तान के शहर "

मास्टर तुलसी ज्ञान द्वारा
                              अपने अंदाज में कविता
चीन के वुहान शहर के गलियों से गुजरती हुई,
कुछ ही दिनों में यह बीमारी, महामारी बन गई,
महामारी का नाम "कोरोनावायरस" रख दी गई,
बेरहम "कोरोनावायरस" की लहर हर दिशा में फैल गई है,
चीन, जापान, इटली, फ्रांस, अमेरिका, ब्रिटेन और ईरान आदि देशों को इसमें किया बहुत परेशान,
देखकर आंखें बंद कर ली जिसने, उसकी हो गई हालत पंचर,
दोनों हाथ से कटोरा उठाकर, भीख मांगने लगा वो कंजर,
ऐसा देश है “पाकिस्तान”,
लेकिन मदद के लिए उठ गए जो,
हनुमान की तरह उड़ गए जो,
दवा, दया और दुआएं पहुंचाई जिन्होंने, वह देश है "हिंदुस्तान"।
करोड़ों धन का दान दिया, सार्क (SAARC) देशों की करी अगुवाई,
तन, मन, धन से मदद करने की, आश्वासन दिया बड़ा महान,
इस महामारी के संकट काल में, श्री नरेंद्र मोदीजी बन गए हनुमान।
कई देशों में फंसे प्रवासी लोगों को बचा कर लाए और बचाई उनकी जान,
लेकिन अभी भी बांकी था, यह तो सिर्फ कोरोनावायरस का झांकी था।
देखते ही देखते इस शैतान ने अपने चपेट में ले लिया पूरा “हिंदुस्तान”। 
परिश्रमी ने किया परिश्रम, श्री मोदीजी ने किया आह्वान,
सभी शासन, प्रशासन और कोरोना वॉरियर्स ने संभाली कमान,
125 करोड़ लोगों को साथ दिया, अभय हुआ हिंदुस्तान।


The 🌎world is very big but you can travel on it. Problems and difficulties are too many but you can solve your problems and get out from difficulties one by one. Right now, you have tripple ✨ stars but you need five ⭐✨⭐ stars. यह दुनिया बहुत बड़ी है लेकिन आप इस पर यात्रा कर सकते हैं। समस्याएँ और कठिनाइयाँ बहुत अधिक हैं लेकिन आप अपनी समस्याओं का समाधान कर सकते हैं और एक-एक करके कठिनाइयों से छुटकारा पा सकते हैं। अभी आपके पास तीन तारे हैं लेकिन आपको पाँच की आवश्यकता है।

 


📖🌎✨🏆जीवों के लिए थककर थमना प्राकृतिक मज़बूरी है किंतु थकने के बाद दम लेकर अपने कार्य में रम जाना भी ज़रूरी है।
इसी प्रकार ठंडी में जमकर ठोस बने द्रव्यों को गर्मी में पिघलना पड़ेगा और यदि बढ़ जाए गर्मी तो वाष्पित होकर वायु के साथ विचरणा पड़ेगा, यह कहानी अभी अधूरी है।।
पुनः वाष्प से द्रव और द्रव से ठोस में परिवर्तित होगी तब यह जल चक्र की कहानी पूरी है।।।
 ऐसी जल चक्र की प्राकृतिक संरचना है, जैसा जिसका उपयोग वैसे ही रचाना है। जल के साथ जीने के लिए यह सीख हमारी धुरी है और जलचक्र ही इसकी चूड़ी है।।।।🌎✨💖



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